भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय एवं नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने मिलकर महा जल मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन का उद्देश्य जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों का समाधान मिशन-उन्मुख और समाधान-आधारित अनुसंधान के जरिए करना है।
एएनआरएफ, जो एक सांविधिक निकाय है, इसकी स्थापना 2023 के अधिनियम के तहत हुई है और इसका कार्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के अनुसार प्राकृतिक विज्ञान, मानविकी और सामाजिक विज्ञान के वैज्ञानिक इंटरफेस में अनुसंधान, नवाचार तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित करना, निगरानी करना और आवश्यक सहायता प्रदान करना है।
महा जल मिशन, जिसे 1 जून 2026 को शुरू किया गया, पांच मुख्य विषयों पर केंद्रित है: जल संसाधन का आकलन एवं सतत प्रबंधन, पेयजल, जल गुणवत्ता, मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य, जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी, और जलवायु रिजिलियंस एवं अनुकूलन। यह मिशन बहुविषयक, बहुसंस्थागत और बहु-अन्वेषक परियोजना है जिसमें औद्योगिक साझेदारियां भी शामिल हैं।
एएनआरएफ के अंतर्गत कई प्रमुख अन्वेषकों, अकादमिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों, डीएसआईआर-एसआईआरओ पंजीकृत संस्थानों तथा पात्र कंपनियों के कंसोर्टियम मोड में प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं। इसके लिए कम से कम एक स्टार्ट-अप, एमएसएमई या इंडस्ट्री पार्टनर की भागीदारी आवश्यक है, जो कुल परियोजना लागत का 10% नकद योगदान करता है। संबंधित जानकारी https://anrfonline.in/ANRF/mahawp_anrf?HomePage=New वेबसाइट पर उपलब्ध है।
स्टार्ट-अप एवं एमएसएमई की भागीदारी को आसान बनाने और जल संबंधी नई तकनीकों के विकास व कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए भारत डब्ल्यू यू आई एन (विन) पोर्टल की शुरुआत की गई है।
जल क्षेत्र की मुख्य चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक, बड़े पैमाने पर लागू और फील्ड-रेडी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जल शक्ति हैकाथॉन-2025 का आयोजन भी किया गया है।
जल क्षेत्र से संबंधित अनुसंधान और विकास के परिणामों को राज्यों, संघ क्षेत्र, सहयोगी मंत्रालयों और कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ साझा करके इन्हें अपनाने तथा लागू करने को प्रोत्साहित किया जाता है।
यह जानकारी जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में दी है।
मुख्य जानकारी
• महा जल मिशन की शुरुआत 1 जून 2026 को की गई है।
• मिशन के पांच मुख्य विषय: जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल, जल गुणवत्ता, मानव एवं पारिस्थितिक स्वास्थ्य, जल उपयोग दक्षता और जलवायु अनुकूलन।
• परियोजनाओं के लिये स्टार्ट-अप/एमएसएमई की भागीदारी अनिवार्य है।
• भारत डब्ल्यू यू आई एन पोर्टल स्टार्ट-अप/एमएसएमई के लिए सहायता प्रदान करता है।
• जल शक्ति हैकाथॉन-2025 के माध्यम से फील्ड-रेडी तकनीकों को बढ़ावा।
• अनुसंधान परिणामों को राज्यों, मंत्रालयों और कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ साझा कर कार्यान्वयन सुनिश्चित।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB)
