भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ऋण वसूली और रिकवरी एजेंटों की नियुक्ति से संबंधित नियामक संस्थाओं के आचरण पर संशोधन आदेश जारी किए हैं। यह संशोधन आदेश 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
इससे पहले RBI ने 20 मई 2026 को संशोधित मसौदा आदेश जारी कर विभिन्न हितधारकों से प्रतिक्रिया मांगी थी। प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर आवश्यक संशोधन कर अंतिम निर्देश जारी किए गए हैं। प्राप्त प्रतिक्रिया का विवरण एक परिशिष्ट में उपलब्ध है।
मुख्य जानकारी
जारी किए गए संशोधन आदेशों में सभी नियमन संस्थाओं (REs) के लिए ऋण वसूली प्रक्रिया के दौरान उचित आचरण संबंधी व्यापक दिशा-निर्देश शामिल हैं। इनमें वसूली प्रक्रिया के दौरान उधारकर्ताओं के साथ उचित व्यवहार, ऋणदाताओं के कर्मचारियों एवं रिकवरी एजेंटों के आचरण, पूर्वापरिशोधन, प्रशिक्षण, आचार संहिता आदि विषय शामिल हैं। साथ ही, उधारकर्ता के मोबाइल उपकरण में वित्तपोषित ऋण की वसूली हेतु टेक्नोलॉजी आधारित प्रक्रियाओं का उपयोग करते हुए आचरण का भी समावेश है।
ये संशोधन आदेश निम्नलिखित श्रेणियों के लिए जारी किए गए हैं:
- वाणिज्यिक बैंक
- लघु वित्त बैंक
- स्थानीय क्षेत्रीय बैंक
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
- शहरी सहकारी बैंक
- ग्रामीण सहकारी बैंक
- अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान
- गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां
- हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां
इन आदेशों के माध्यम से RBI यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ऋण वसूली की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और सम्मानजनक हो तथा उधारकर्ताओं के हितों का पूरा ध्यान रखा जाए।
(बृज राज)
मुख्य महा प्रबंधक
