सरकार ने राज्यसभा को जानकारी दी है कि डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन की दो प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं – ‘डॉ. अम्बेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटीग्रेशन थ्रू इंटर-कास्ट मैरिजेज’ और ‘डॉ. अम्बेडकर नेशनल रिलीफ टू द शेड्यूल्ड कास्ट्स/शेड्यूल्ड ट्राइब्स विक्टिम्स ऑफ एट्रोसिटीज स्कीम’ को 31 मार्च 2023 से सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की केंद्र प्रायोजित योजना के साथ विलय कर दिया गया है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने इस संबंध में राज्यसभा में प्रश्न संख्या 2052 के जवाब में बताया कि ये योजनाएं नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के सफल कार्यान्वयन के लिए केंद्र प्रायोजित योजना के तहत समाहित की गई हैं।
डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन की योजनाओं का विलय होने से पिछले तीन वर्षों में संबंधित श्रेणियों के तहत राज्यवार कोई लंबित आवेदन नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि केंद्र प्रायोजित योजना के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है, और इसके प्रभावी कार्यान्वयन की जिम्मेदारी उन्हीं की है।
विलय के बाद उत्पन्न लंबित मामलों के समाधान के लिए डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन ने एक विशेष पहल भी शुरू की है। इसके तहत ‘अंतर-जातीय विवाह के माध्यम से सामाजिक एकीकरण के लिए डॉ. अम्बेडकर योजना’ के अंतर्गत 385 मामलों में लगभग ₹9 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी की गई है।
सरकार सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देने और पात्र लाभार्थियों को राहत एवं सहायता प्रदान करने के लिए कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु लगातार प्रयासरत है।
मुख्य जानकारी
• डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन की दो योजनाओं को 31 मार्च 2023 से केंद्र प्रायोजित योजना में विलय कर दिया गया।
• यह विलय योजनाओं के कार्यान्वयन में दोहराव से बचने के लिए किया गया।
• मामले के निपटारे के लिए डॉ. अम्बेडकर फाउंडेशन ने विशेष पहल शुरू की है।
• अंतर-जातीय विवाह के 385 मामलों में लगभग ₹9 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी।
• केंद्र प्रायोजित योजना के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB)
