भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की छात्रवृत्तियों और फेलोशिप की राशि अब राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से सीधे पात्र छात्रों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। केंद्र सरकार ने इस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुगम, कुशल और समयबद्ध बनाने के लिए केंद्रीकृत DBT प्रणाली लागू की है।
इस पहल का शुभारंभ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित पूसा संस्थान के परिसर में बी.पी. पाल सभागार में किया। इस कार्यक्रम में ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट और कृषि राज्यमंत्री श्री भागीरथ चौधरी भी उपस्थित थे।
इस नई व्यवस्था के तहत शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में ICAR के माध्यम से प्रवेश पाने वाले स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएच.डी. स्तर के करीब 6,000 से अधिक पात्र छात्रों को छात्रवृत्ति या फेलोशिप की मंजूरी के बाद राशि सीधे उनके बैंक खातों में वितरित की गई है। कुल राशि करीब 21.35 करोड़ रुपये है।
ICAR की यह पहल छात्रों को बिना किसी आर्थिक कठिनाई के अपनी शैक्षिक आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ-साथ कृषि और संबंधित विज्ञानों के उभरते और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने प्रोत्साहित करती है। इसके अलावा इस प्रणाली से वित्तीय सहायता समय पर लाभार्थियों तक पहुँचेगी और वितरण प्रक्रिया की दक्षता, पारदर्शिता तथा जवाबदेही में वृद्धि होगी।
कृषि राज्यमंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने भी कहा कि समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना छात्रों को बिना किसी बाधा के शिक्षा और अनुसंधान जारी रखने में महत्वपूर्ण मदद देगा।
डीबीटी प्रणाली के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योग्य छात्रों को समय पर आर्थिक सहायता मिले, जिससे उनका शैक्षणिक जीवन निर्बाध रूप से जारी रह सके। ICAR की यह व्यवस्था आगे चलकर सभी योग्य छात्र तक विस्तारित की जाएगी।
मुख्य जानकारी
• ICAR छात्रवृत्ति और फेलोशिप राशि का वितरण राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से सीधे बैंक खातों में किया जाएगा।
• केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस DBT प्रणाली का शुभारंभ किया।
• इस पहल से लगभग 6,000 से अधिक ICAR विद्यार्थियों के खातों में 21.35 करोड़ रुपये सीधे पहुंचाए गए हैं।
• यह व्यवस्था वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और जवाबदेह बनाती है।
• ICAR की प्रतिबद्धता कृषि एवं संबंधित विज्ञानों में उच्च शिक्षा और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB)
