आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के होनहार छात्रों के लिए प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला मिलना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन उच्च शिक्षा का खर्च बड़ा झटका बन सकता है। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की 26 वर्षीय छात्रा ऐतिपमुला ऊहा को पीएम-वाईएएसएएसवीआई योजना के तहत मिली छात्रवृत्ति ने उन्हें आईआईएम रायपुर में एमबीए की पढ़ाई करने में सहायता की है।
निम्न मध्यम वर्गीय पारिवारिक पृष्ठभूमि वाली ऊहा के पिता एक फोटोग्राफर हैं, जिनकी सीमित आमदनी के बावजूद माता-पिता ने उनकी शिक्षा के प्रति हमेशा समर्थन दिया। ऊहा का सपना प्रशासनिक अधिकारी बनने का है, जो उन्होंने दृढ़ संकल्प से हासिल करना चाहा।
आईआईएम रायपुर में प्रवेश तो मिल गया, लेकिन लगभग 20 लाख रुपये की फीस बड़ी चुनौती थी। परिवार ने बिना कोलेटरल के कर्ज लेकर पढ़ाई जारी रखने की कोशिश की, लेकिन आर्थिक चिंता बनी रही।
अप्रैल 2026 में पीएम-वाईएएसएएसवीआई छात्रवृत्ति के तहत ऊहा को 10.27 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली, जिसने उनके परिवार को बहुत राहत दी। इस मदद से वे आत्मविश्वास के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख पा रही हैं।
ऊहा ने कहा, “एमबीए में सीट मिलना परिवार के लिए बड़ा अवसर था, लेकिन फीस की चिंता थी। छात्रवृत्ति मिलने से आर्थिक दबाव कम हुआ और पढ़ाई पर ध्यान देने का मौका मिला।”
पीएम-वाईएएसएएसवीआई योजना ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे वे आर्थिक बाधाएं पार कर अपने सपने पूरे कर सकें।
आज ऐतिपमुला ऊहा एक सफल करियर की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं और प्रशासनिक अधिकारी बनने के अपने लक्ष्य को पूरा करने की तैयारी में हैं। उनकी कहानी शिक्षा के महत्व और समय पर मिलने वाली सहायता की अहमियत को दर्शाती है।
