जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने 1 जून 2026 को महा जल मिशन एमएएचए जल कार्यक्रम की शुरूआत की। यह कार्यक्रम जल क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों के समाधान के लिए मिशन-उन्मुख एवं समाधान-आधारित अनुसंधान को समर्थन प्रदान करता है। यह पहल जल क्षेत्र की सतत विकास के लिए उच्च स्तरीय रणनीतिक दिशा, नवाचार, उद्यमिता, और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए गठित की गई है।
एमएएचए जल कार्यक्रम पांच प्रमुख विषयों पर केंद्रित है: जल संसाधन का आकलन एवं सतत प्रबंधन, पेयजल, जल गुणवत्ता, मानव और पारिस्थितिक स्वास्थ्य, जल उपयोग दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी, तथा जलवायु लचीलापन और अनुकूलन। इस कार्यक्रम के तहत प्रधान अन्वेषकों, अकादमिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं, अनुसंधान संगठनों, डीएसआईआर-एसआईआरओ और धारा 8 की पात्र कंपनियों वाले कंसोर्टियमों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं। कुल परियोजना लागत के 10% नकद योगदान के साथ कम से कम एक स्टार्ट-अप, एमएसएमई या इंडस्ट्री पार्टनर की भागीदारी अनिवार्य है।
जल से जुड़ी नई तकनीकों के विकास और लागू करने की गति बढ़ाने के लिए भारत डब्ल्यूआईएन (विन) पोर्टल की शुरुआत की गई है, जो स्टार्ट-अप और एमएसएमई की भागीदारी को अत्यंत सुगम बनाता है। इसके अतिरिक्त, जल क्षेत्र की मुख्य चुनौतियों के समाधान के लिए व्यावहारिक तथा फील्ड-रेडी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने हेतु ‘जल शक्ति हैकाथॉन-2025’ का आयोजन भी किया गया है।
जल क्षेत्र से जुड़े अनुसंधान एवं विकास के परिणामों को हितधारकों जैसे राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, सहयोगी मंत्रालयों और परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ साझा कर उन्हें अपनाने एवं कार्यान्वित करने हेतु सहयोग किया जा रहा है।
यह जानकारी जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी द्वारा लोकसभा में प्रस्तुत लिखित उत्तर में प्रदान की गई है।
मुख्य जानकारी
महा जल मिशन के अंतर्गत मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इम्पैक्ट एरियाज़ (एम.ए.एच.ए.) नामक कार्यक्रम एएनआरएफ के तहत संचालित होता है, जिसका उद्देश्य देश की प्रमुख आवश्यकताओं के अनुरूप प्राथमिकता आधारित, समाधान केंद्रित अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है। यह एक बहुविषयक, बहुसंस्थागत तथा बहु-अन्वेषक परियोजना है जिसमें औद्योगिक साझेदारियां भी शामिल हैं।
एमएएचए जल कार्यक्रम जल क्षेत्र की जटिल चुनौतियों पर सतत और परिणामोन्मुख हल खोजने में सहायता करता है। इसके जरिए नए शोध, तकनीक विकास और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाता है, जिससे जल संसाधन प्रबंधन में सुधार संभव है।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB)
