राज्यसभा की वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने भारत-अमेरिका व्यापार पर 200वीं रिपोर्ट प्रस्तुत की

राज्यसभा की संबंधित स्थायी समिति ने 6 अगस्त 2026 को भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका व्यापार संबंधों पर अपनी 200वीं रिपोर्ट संसद में प्रस्तुत की।

सुश्री दोला सेन की अध्यक्षता वाली राज्यसभा की विभाग संबंधित वाणिज्य संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने 6 अगस्त 2026 को संसद के दोनों सदनों में भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका व्यापार संबंधों का मूल्यांकन करते हुए अपनी 200वीं रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में अमेरिकी टैरिफ उपायों से उत्पन्न चुनौतियों की पहचान की गई है और उन क्षेत्रों में समाधान के लिए सिफारिशें दी गई हैं।

समिति ने चार बैठकों में कुल 7 घंटे 50 मिनट की जांच के दौरान वाणिज्य, वित्त, मत्स्य पालन, पशुपालन, कृषि, कौशल विकास सहित कई मंत्रालयों और विभागों के साथ-साथ बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों तथा विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श किया। 5 अगस्त 2026 को आयोजित अंतिम बैठक में समिति ने प्रारूप रिपोर्ट पर विचार कर इसे स्वीकृत किया।

मुख्य जानकारी

रिपोर्ट में प्रमुख सिफारिशों में द्विपक्षीय व्यापार समझौते का शीघ्र संपन्न होना, व्यापार बाधाओं का समाधान, निर्यात अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, एमएसएमई के लिए विशेष सहायता, अमेरिकी बंदरगाहों पर तकनीकी बाधाओं को दूर करना, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारतीय निर्माताओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना, तथा नीतिगत संवाद के माध्यम से व्यापार घर्षणों को कम करना शामिल है।

समिति ने डिजिटल अर्थव्यवस्था, सेवा क्षेत्र, कृषि, मत्स्य पालन, वस्त्र उद्योग, रसायन, इस्पात, चमड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, और रत्न-आभूषण उद्योगों में सहयोग बढ़ाने के भी सुझाव दिए हैं। रोजगार संरक्षण, निर्यात संवर्धन योजनाओं का कार्यान्वयन, गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात वित्त पोषण, पर्यावरणीय स्थिरता संसाधनों का दोहन और प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि के उपाय भी रिपोर्ट में शामिल हैं।

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार-से-व्यापार, औद्योगिक सहयोग और निवेश प्रवाह को बढ़ावा देने की ओर ध्यान देने के साथ-साथ विश्व व्यापार संगठन की बहुपक्षीय वार्ताओं में सक्रिय सहभागिता की आवश्यकता पर भी रिपोर्ट प्रकाश डालती है।

समिति ने निर्यात बाजारों में विविधीकरण, प्रौद्योगिकी उन्नयन, टिकाऊ विनिर्माण प्रथाओं को अपनाने, रसद लागत में कमी, और नवाचार को प्रोत्साहित करने की सिफारिश की है। डाटा और डिजिटल संरचना की मजबूती से भारतीय वैश्विक क्षमता केंद्रों एवं आईटी सेवाओं के विकास को भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था भारत के निर्यात और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालती रही है और इसे स्थिर, पूर्वानुमानित और पारस्परिक लाभकारी बनाना आवश्यक है। इसलिए, भारतीय हितों की सुरक्षा के लिए समयबद्ध रणनीति बनाई जानी चाहिए।

विस्तृत रिपोर्ट https://sansad.in/rs पर उपलब्ध है।

स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB)

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