राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रतिवर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिन बुनाई की विरासत का उत्सव मनाया जाता है और 35.22 लाख बुनकरों एवं संबद्ध श्रमिकों को मान्यता दी जाती है, जिनमें 72 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं। वर्ष 2026 में यह अवसर भारत के हथकरघा उद्योग की क्षेत्रीय विविधता और नवीनता को दर्शाता है। डिजाइनों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक बाजारों के ज़रिये हथकरघा को नई अभिव्यक्ति मिल रही है। सरकारी सहायता, पुरस्कार, बाजार पहुंच और प्रामाणिकता सुरक्षा उपायों से इन परंपराओं को ग्रामीण समुदायों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया जा रहा है।
मुख्य जानकारी
भारत की हथकरघा परंपराएं सिंधु घाटी सभ्यता तक फैली हुई हैं। बुनाई का उल्लेख ऋग्वेद, रामायण, महाभारत में और कौटिल्य के साहित्य में मिलता है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की स्थापना 2015 में हुई, जो बुनकरों के सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक योगदान को मान्यता देता है।
हथकरघा बुनाई पारंपरिक शिल्प है, पर इसका परिदृश्य समय के साथ बदल रहा है। आज समकालीन डिजाइन, डिजिटल तकनीकें और प्रदर्शनी तरीके हथकरघा को नए उपभोक्ताओं से जोड़ रहे हैं। भारत में लगभग 31.45 लाख हथकरघा परिवार और 35.22 लाख बुनकर तथा संबद्ध श्रमिक हैं, जिनमें से 8.48 लाख विभिन्न बुनाई पूर्व एवं पश्चात गतिविधियों में लगे हैं। इस क्षेत्र में अधिकांश महिलाएं (25.46 लाख) काम करती हैं, जो कुल कामगारों का 72% हैं।
राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) और कच्चा माल आपूर्ति योजना (आरएमएसएस) इस क्षेत्र के लिए मुख्य सहायता योजनाएं हैं। एनएचडीपी के अंतर्गत 2020-21 से 2026-27 के दौरान 200 हथकरघा उत्पादक कंपनियां गठित की गईं। इसके अलावा, हथकरघा विपणन सहायता कार्यक्रम से 2021-22 से जून 2026 तक 960 से अधिक प्रदर्शनियां एवं कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) के अंतर्गत बुनकरों को जीवन और दुर्घटना बीमा सुविधा प्रदान की जाती है। 2021-22 से 2026 में इन्हें 80.8% तक नामांकित किया गया है, साथ ही 63.6% धनराशि में वृद्धि देखी गई।
मेगा क्लस्टर विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आठ मेगा क्लस्टर कार्यान्वित हो चुके हैं, जिनसे 1,62,682 हथकरघा बुनकर लाभान्वित हुए हैं। जीएसटी परिषद के परिणामस्वरूप हस्तशिल्प वस्तुओं पर कर दरें कम हुईं, जिससे सिलाई इकाइयों की लागत कम हुई और घरेलू उत्पादन को सशक्त किया गया।
केंद्रीय बजट 2026-27 में राष्ट्रीय फाइबर योजना, वस्त्र विस्तार और रोजगार योजना, राष्ट्र हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम और महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल जैसे विभिन्न नीतिगत पहलें शामिल हैं, जो हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को समग्र समर्थन देती हैं।
हथकरघा चिह्न योजना से 29,402 हथकरघा चिह्न पंजीकरण जारी किए जा चुके हैं, जिससे 815 खुदरा दुकानों पर हथकरघा उत्पाद उपलब्ध हैं। इंडिया हैंडलूम ब्रांड, जिसे 2015 में लॉन्च किया गया, उच्च गुणवत्ता वाले, प्रामाणिक और पर्यावरण के अनुकूल हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देता है, जिसमें त्वचा के अनुकूल रंग प्रयोग होते हैं।
डिजाइन और नवाचार के माध्यम से हथकरघा क्षेत्र के उत्पादों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है, जैसे कि डीसी हैंडलूम्स और एनआईएफटी द्वारा मिस इंडिया प्रतियोगिता में हथकरघा बुनाई शैलियों का अनावरण। इसके साथ ही विभिन्न प्रदर्शनियां और प्लेटफार्म क्षेत्रीय बुनाई की लोकप्रियता और वैश्विक पहुंच में योगदान दे रहे हैं।
सरकारी समर्थन, जैसे कि ई-पहचान पोर्टल, हथकरघा मुद्रा पोर्टल, ट्रेड प्रमोशन, और काफ़ी योजनाओं से हथकरघा बुनकरों और उद्योग को सशक्त बनाया गया है। यह परंपरागत ज्ञान को आधुनिक तकनीक और वैश्विक बाजार के अनुरूप विकसित करने पर केंद्रित है।
यह दिवस न केवल भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत का पर्व है बल्कि इसके भविष्य की संभावनाओं की भी याद दिलाता है, जिसमें हथकरघा उद्योग ग्रामीण आजीविका से जुड़ा हुआ है और निरंतर विकास कर रहा है।
स्रोत: https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2295397
