कोयला मंत्रालय ने सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को प्रोत्साहन देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना के संबंध में आवेदन प्रक्रिया की स्थिति को स्पष्ट किया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस योजना के लिए आवेदन न मिलने की सूचना देने पर मंत्रालय ने बताया कि ऐसी रिपोर्टें समय से पहले प्रकाशित की गई हैं और उनकी वास्तविक स्थिति से कोई लेना-देना नहीं है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 मई 2026 को इस योजना को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य घरेलू कोयला और लिग्नाइट को मूल्यवर्धित उत्पाद जैसे सिनगैस, मेथनॉल, अमोनिया तथा यूरिया में परिवर्तित करने के माध्यम से देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती को बढ़ाना है। योजना के तहत लगभग 25 परियोजनाओं में 2.5 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये तक निवेश और लगभग 50,000 रोजगार सृजन की संभावना है।
मंत्रालय ने योजना की मंजूरी के बाद कान्सिपर्ण तथा प्रोत्साहन के लिए तीन स्थानों पर रोड शो आयोजित किए और हितधारकों का व्यापक जुड़ाव सुनिश्चित किया। इस योजना के लिए आवेदन जमा करने की पहली अवधि सात सितंबर 2026 तक चल रही है। मंत्रालय ने बताया कि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह भी नहीं हुई है, इसलिए यह कहना कि कोई आवेदन नहीं आया है, उचित नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार, तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड और एनटीपीसी लिमिटेड ने अपने आवेदन इस योजना के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत किए हैं। इसके अलावा अन्य संभावित आवेदक भी परियोजना प्रस्ताव अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। परियोजनाओं की जटिलता को देखते हुए आवेदकों को विस्तृत तैयारी करनी होती है, जिसमें पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन और प्रौद्योगिकी विकल्पों का मूल्यांकन शामिल है।
आवेदन प्रक्रिया निरंतर चलने वाली होगी, जहां एक चरण के बाद अगला चरण अगले ही दिन शुरू होगा। इससे समयपूर्व तैयारी के अभाव के कारण किसी भी कंपनी को बाहर नहीं रखा जाएगा। मंत्रालय को इस योजना में उद्योग जगत की अच्छी भागीदारी पर पूरा भरोसा है और इससे 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण क्षमता हासिल करने में मदद मिलेगी।
मंत्रालय ने यह भी दोहराया है कि योजना अभी प्रारंभिक कार्यान्वयन चरण में है, इसलिए सफलता और भागीदारी का आकलन आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उचित होगा। वे पूरी उम्मीद जताते हैं कि इस योजना से भारत में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण को नई गति मिलेगी।
स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB)
